top of page

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता

Sep 20, 2021
1 min read

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस में तिरी क्या हर शख़्स मिरा साथ निभा भी नहीं सकता

प्यासे रहे जाते हैं ज़माने के सवालात किस के लिए ज़िंदा हूँ बता भी नहीं सकता

घर ढूँड रहे हैं मिरा रातों के पुजारी मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता

वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता


शायर: वसीम बरेलवी

Related Posts

See All
मेरे अशआर किसी.. को ना सुनाने देना

मेरे अशआर किसी.. को ना सुनाने देना जब मै दुनिया से चला ..जाऊँ तो जाने देना साथ इनके है बहुत ख़ाक उड़ाई मैंने इन हवाओं को मेरी ख़ाक उड़ाने...

 
 
 

Comments


bottom of page